दोस्तों नमस्कार,
आज फिर आप के साथ बात करने का मौका खुदा ने दिया है। ये उस परवरदिगार की नियामत है की वह उसको अवसर प्रदान करता है । सही मायनो में बन्दा वही है जो उसकी दी हुई जिंदगानी को सही रास्ते पर चलाता है। और जिंदगानी का मतलब समझता है। मैं समझता हूँ की जो लोग सही काम करते हैं । ऊपरवाला उसकी सदा मदद करता है।
द्वारा- भजन सिंह घारू
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Sunday, September 19, 2010
Saturday, September 4, 2010
नमस्कार,
कल दिनांक ५ सितम्बर को टीचर दे के रूप मै मनाया जाता है। मै उन टीचेरो को धन्यवाद् देता हूँ जो इस सेवा मै समर्पित हैं । और अपना कार्य ईमानदारी के साथ करते हैं। दूजो को ज्ञान देना इक पुन कर्म माना जाता है। बार-बार इस कार्य से जुरे लोगो पर आलोचना की मार परती है। पर फिर भी यह पावन कर्म है। मै इन्हें सलाम करता हूँ।
द्वारा- भजन सिंह घारू
कल दिनांक ५ सितम्बर को टीचर दे के रूप मै मनाया जाता है। मै उन टीचेरो को धन्यवाद् देता हूँ जो इस सेवा मै समर्पित हैं । और अपना कार्य ईमानदारी के साथ करते हैं। दूजो को ज्ञान देना इक पुन कर्म माना जाता है। बार-बार इस कार्य से जुरे लोगो पर आलोचना की मार परती है। पर फिर भी यह पावन कर्म है। मै इन्हें सलाम करता हूँ।
द्वारा- भजन सिंह घारू
Thursday, September 2, 2010
Tuesday, August 31, 2010
नमस्कार,
दिनांक २९ ऑगस्ट २०१० को जब मैं जम्मू से टाटा सुमो से वापिस श्रीनगर आ रहा था तो ३-४ बोयस सरक के किनारे खरे थे अवंतिपुर से पिच्छे ही गारी से लिफ्ट मांगी बाद मे पठेरों से सुमो पर वार किया गोड की महेरबानी से वे पाथेर सवारी को नहीं लगे । असे लोगो को ऊपर वाला कभी माफ़ नहीं करता । उसके घर मे कोई जोर अज्मयीस नहीं कर सकता । उसने सबको बनाया है एसलिय किसे की चालाकी नहीं चलती ।
द्वारा- भजन सिंह घारू
दिनांक २९ ऑगस्ट २०१० को जब मैं जम्मू से टाटा सुमो से वापिस श्रीनगर आ रहा था तो ३-४ बोयस सरक के किनारे खरे थे अवंतिपुर से पिच्छे ही गारी से लिफ्ट मांगी बाद मे पठेरों से सुमो पर वार किया गोड की महेरबानी से वे पाथेर सवारी को नहीं लगे । असे लोगो को ऊपर वाला कभी माफ़ नहीं करता । उसके घर मे कोई जोर अज्मयीस नहीं कर सकता । उसने सबको बनाया है एसलिय किसे की चालाकी नहीं चलती ।
द्वारा- भजन सिंह घारू
Tuesday, August 10, 2010
Monday, May 31, 2010
समय
नमस्कार !
समय बहुत बलवान है । हर व्यक्ति को अपने वकत का सही उपयोग करना चाहिय नहीं तो आपको बहुत भारी नुकशान हो सकता है । अंत मानव को समय सही उपयोग करना आवस्यक हो जाता है ।
द्वारा- भजन सिंह घारू
समय बहुत बलवान है । हर व्यक्ति को अपने वकत का सही उपयोग करना चाहिय नहीं तो आपको बहुत भारी नुकशान हो सकता है । अंत मानव को समय सही उपयोग करना आवस्यक हो जाता है ।
द्वारा- भजन सिंह घारू
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