Saturday, September 21, 2013

Top Desert of the World

Top Desert of the World
s.no
Name of Desert
Country/Continents
Total Areas kms²
1.
Sahara
North Africa
90,65,000 kms²
2.
Libyan
North Africa
16,83.500 kms²
3.
Australian
Australia
15,54,000 kms²
4.
Gobi
Mangolia
10,36.000 kms²
5.
Rab all Khali
Arab
6,47,500 kms²
6.
Kalahari
Botswana
5,18,000 kms²
7.
Grate Sandy
Australia
4,14,400 kms²
8.
Takla Makan
China
3,23,800 kms²
9.
Great Victoria
Australia
3.23.800 kms²
10.
Syrian
Arab
3,23,800 kms²
11.
Arunata
Australia
3,10,800 kms²
12.
Kara Kum
S.W.Turkistan
2,72,000 kms²
13.
Nubian
North Africa
2,59,000 kms²
14.
Thar
N.W.India
2,59,000 kms²
15.
Kigilkum
Middle Turkistan
2,33,100 kms²
16.
Arabian
Arab
1,29,500 kms²


Tuesday, September 3, 2013


1.आकाश 


2. जल 


3· अग्नि 


4· वायु 


5· पृथ्वी


EARTH





विवरणपृथ्वी आकार में पाँचवाँ सबसे बड़ा और सूर्य से दूरी के क्रम में तीसरा ग्रह है। सौरमण्डल का एकमात्र ग्रह, जिस पर जीवन है।
अनुमानित आयु4600,000,000 (चार अरब साठ करोड़) वर्ष
सम्पूर्ण धरातलीय क्षेत्रफल510,100,500 (इक्यावन करोड़ एक लाख पाँच सौ) वर्ग किमी
भूमि क्षेत्रफल14,84,00,000 वर्ग किमी
जलीय क्षेत्रफल36,13,00,000 वर्ग किमी (71%)
आयतन1.08321X1012 घन किमी
द्रव्यमान5.9736×1024 किग्रा
औसत घनत्व5.52 (पानी के घनत्व के सापेक्ष)
व्यास12,742 किमी
विषुवत रेखीय व्यास12,756 किमी
ध्रुवीय व्यास12,714 किमी
समुद्रतल से अधिकतम ऊँचाई8848 मीटर (माउंट एवरेस्ट)
समुद्रतल से अधिकतम गहराई11,033 मीटर (मरियाना ट्रेंच)
सूर्य से दूरी14,95,97,900 (14 करोड़, 95 लाख, 97 हज़ार, नौ सौ) किमी
चन्द्रमा से दूरी3,84,403 किमी (लगभग)
परिभ्रमण काल365 दिन, 5 घण्टे, 48 मिनट, 45.51 सेकण्ड
घूर्णन अवधि23 घण्टे, 56 मिनट, 4.091 सेकण्ड (अपने अक्ष पर)
उपग्रहचन्द्रमा
सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में लगने वाला समय8 मिनट 18 सेकण्ड
पृथ्वी के धरातल का सर्वाधिक निचला स्थानमृत सागर अथवा डेड सी (समुद्र तल से 423 मीटर नीचे)

Planets

सौरमण्डल के ग्रह - दायें से बाएं - बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, युरेनस और नेप्चून




सूर्य या किसी अन्य तारे के चारों ओर परिक्रमा करने वाले खगोल पिण्डों को ग्रह कहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के अनुसार हमारे सौर मंडल में आठ ग्रह हैं -बुधशुक्रपृथ्वीमंगलबृहस्पतिशनियुरेनस और नेप्चून. इनके अतिरिक्त तीन बौने ग्रह और हैं - सीरीसप्लूटो और एरीस। प्राचीन खगोलशास्त्रियों ने तारों और ग्रहों के बीच में अन्तर इस तरह किया- रात में आकाश में चमकने वाले अधिकतर पिण्ड हमेशा पूरब की दिशा से उठते हैं, एक निश्चित गति प्राप्त करते हैं और पश्चिम की दिशा में अस्त होते हैं। इन पिण्डों का आपस में एक दूसरे के सापेक्ष भी कोई परिवर्तन नहीं होता है। इन पिण्डों को तारा कहा गया। पर कुछ ऐसे भी पिण्ड हैं जो बाकी पिण्डों के सापेक्ष में कभी आगे जाते थे और कभी पीछे - यानी कि वे घुमक्कड़ थे। Planet एक लैटिन का शब्द है, जिसका अर्थ होता है इधर-उधर घूमने वाला। इसलिये इन पिण्डों का नाम Planet और हिन्दी में ग्रह रख दिया गया। शनि के परे के ग्रह दूरबीन के बिना नहीं दिखाई देते हैं, इसलिए प्राचीन वैज्ञानिकों को केवल पाँच ग्रहों का ज्ञान था, पृथ्वी को उस समय ग्रह नहीं माना जाता था।
ज्योतिष के अनुसार ग्रह की परिभाषा अलग है। भारतीय ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में नौ ग्रह गिने जाते हैं, सूर्य, चन्द्रमा, बुध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि, राहु औरकेतु

Caste Systems in    INDIA 











आर्यों में जाति व्यवस्था

आर्यों में जाति व्यवस्था



प्रत्येक श्रेष्ठ और सुसभ्य मनुष्य आर्य है | अपने आचरण, वाणी और कर्म में वैदिक सिद्धांतों का पालन करने वाले, शिष्ट, स्नेही, कभी पाप कार्य न करनेवाले, सत्य की उन्नति और प्रचार करनेवाले, आतंरिक और बाह्य शुचिता इत्यादि गुणों को सदैव धारण करनेवाले आर्य कहलाते हैं |  ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र यह चार वर्ण वास्तव में व्यक्ति को नहीं बल्कि गुणों को प्रदर्शित करते हैं. प्रत्येक मनुष्य में ये चारों गुण (बुद्धि, बल, प्रबंधन, और श्रम) सदा रहते हैं. आसानी के लिए जैसे आज पढ़ाने वाले को अध्यापक, रक्षा करने वाले को सैनिक, व्यवसाय करने वाले को व्यवसायी आदि कहते हैं वैसे ही पहले उन्हें क्रमशः ब्रह्मण, क्षत्रिय या वैश्य कहा गया और इनसे अलग अन्य काम करने वालों को शूद्र. अतः यह वर्ण व्यवस्था जन्म- आधारित नहीं है|
आजकल प्रचलित कुलनाम ( surname)  लगाने के रिवाज से इन वर्णों का कोई लेना-देना नहीं है | हमारे प्राचीन धर्मग्रन्थ रामायण, महाभारत या अन्य ग्रंथों में भी इस तरह से प्रथम नाम- मध्य नाम- कुलनाम लगाने का कोई चलन नहीं पाया जाता है और न ही आर्य शब्द किसी प्रकार की वंशावली को दर्शाता है|  निस्संदेह, परिवार तथा उसकी पृष्टभूमि का किसी व्यक्ति को संस्कारवान बनाने में महत्वपूर्ण स्थान है परंतु इससे कोई अज्ञात कुल का मनुष्य आर्य नहीं हो सकता यह तात्पर्य नहीं है | हमारे पतन का एक प्रमुख कारण है मिथ्या जन्मना जाति व्यवस्था जिसे हम आज मूर्खता पूर्वक अपनाये बैठे हैं और जिसके चलते हमने अपने समाज के एक बड़े हिस्से को अपने से अलग कर रखा है – उन्हें शूद्र या अछूत का दर्जा देकर – महज इसलिए कि हमें उनका मूल पता नहीं है | यह अत्यंत खेदजनक है | आर्य शब्द किसी गोत्र से भी सरोकार नहीं रखता | गोत्र का वर्गीकरण नजदीकी संबंधों में विवाह से बचने के लिए किया गया था | प्रचलित कुलनामों का शायद ही किसी गोत्र से सम्बन्ध भी हो |
आर्य शब्द श्रेष्टता का द्योतक है | और किसी की श्रेष्ठता को जांचने में पारिवारिक पृष्ठभूमि कोई मापदंड हो ही नहीं सकता क्योंकि किसी चिकित्सक का बेटा केवल इसी लिए चिकित्सक नहीं कहलाया जा सकता क्योंकि उसका पिता चिकित्सक है, वहीँ दूसरी ओर कोई अनाथ बच्चा भी यदि पढ़ जाए तो चिकित्सक हो सकता है. ठीक इसी तरह किसी का यह कहना कि शूद्र ब्राह्मण नहीं बन सकता – सर्वथा गलत है |
ब्राह्मण का अर्थ है ज्ञान संपन्न व्यक्ति और जो शिक्षा या प्रशिक्षण के अभाव में ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य बनाने की योग्यता न रखता हो – वह शूद्र है |  परंतु शूद्र भी अपने प्रयत्न से ज्ञान और प्रशिक्षण प्राप्त करके वर्ण बदल सकता है | ब्राह्मण वर्ण को भी प्राप्त कर सकता है | द्विज – अर्थात् जिसने दो बार जन्म लिया हो | जन्म से तो सभी शूद्र समझे गए हैं | ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य इन तीन वर्णों को द्विज कहते हैं क्योंकि विद्या प्राप्ति के उपरांत योग्यता हासिल करके वे समाज के कल्याण में सहयोग प्रदान करते हैं | इस तरह से इनका दूसरा जन्म ‘ विद्या जन्म’ होता है | केवल माता-पिता से जन्म प्राप्त करनेवाले और विद्याप्राप्ति में असफ़ल व्यक्ति इस दूसरे जन्म ‘ विद्या जन्म ‘ से वंचित रह जाते हैं – वे शूद्र हैं |  अतः यदि ब्राह्मण पुत्र भी अशिक्षित है तो वह शूद्र है और शूद्र भी अपने निश्चय से ज्ञान, विद्या और संस्कार प्राप्त करके ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य बन सकता है | इस में माता- पिता द्वारा प्राप्त जन्म का कोई संबंध नहीं है |

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक

नई दिल्ली : भूख से लड़ने के लिए दुनिया के सबसे बडे कार्यक्रम को हरी 

झंडी देते हुए संसद ने सोमवार को ऐतिहासिक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा 

विधेयक को पारित कर दिया जिसमें देश की दो तिहाई अबादी को भारी 

सब्सिड़ी वाला खाद्यान्न अधिकार के तौर पर प्रदान करने का प्रावधान है।

इस महत्वाकांक्षी विधेयक को सरकार पासा पलट देने वाला उपाय मान रही है और इससे देश की 82 करोड़ आबादी को फायदा मिलेगा। राष्ट्रपति से अनुमोदन मिलने के बाद यह विधेयक कानून बन जायेगा।

राज्यसभा ने इस विधेयक और सरकार द्वारा इस संबंध में पांच जुलाई को लाये गये अध्यादेश को खारिज करने के संकल्प पर एक साथ हुई चर्चा के बाद इस प्रस्तावित कानून को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके पहले सदन ने विपक्ष के संकल्प को खारिज कर दिया। लोकसभा इस विधेयक को पिछले हफ्ते ही मंजूरी प्रदान कर चुकी है।

विपक्ष द्वारा इस विधेयक के विभिन्न अनुच्छेदों पर लाये गये 300 से अधिक संशोधनों को उच्च सदन ने नामंजूर कर दिया।

विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह चुनाव को ध्यान में रखकर लाया गया एक हथकंडा है। साथ ही इसमें खाद्य क्षेत्र की विभिन्न योजनाओं की ‘रिपैकेजिंग’ कर दी गयी है।

इस विधेयक में लोगों को पांच किलोग्राम चावल, गेहूं एवं मोटा अनाज क्रमश: तीन, दो और एक रूपये प्रति किलोग्राम की दर से हर माह प्रदान करने की गारंटी दी गयी है। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए खाद्य मंत्री के वी थामस ने संप्रग सरकार के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक लाने से पहले राज्यों से चर्चा नहीं करने के आरोपों से इंकार किया। 
उन्होंने कहा कि इस बारे में अधिकतर मुख्यमंत्रियों से बातचीत की गयी थी तथा इस प्रस्तावित कानून में किसानों के हितों की रक्षा के पर्याप्त प्रावधान किये गये है।

उन्होंने कहा कि राज्यों से कई बार सलाह मशविरा किया गया था तथा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पंजाब के प्रकाश सिंह बादल, छत्तीसगढ़ के रमन सिंह सहित अधिकतर मुख्यमंत्रियों से बातचीत की गयी।

उन्होंने इन चिन्ताओं को भी खारिज किया कि नये उपायों से राज्यों के अधिकारों का हनन होगा। थामस ने कहा कि जब केन्द्र और राज्य मिलकर काम करेंगे, तभी यह कानून सफल होगा। ‘हम देश की संघीय व्यवस्था को बनाये रखेंगे। हम इसे कमजोर नहीं करना चाहते।’

थामस ने विपक्ष के नेता अरुण जेटली के स्पष्टीकरण मांगे जाने पर कहा कि विभिन्न राज्यों में फिलहाल जो योजनाएं चल रही हैं उन्हें प्रस्तावित कानून के तहत संरक्षण मिलेगा।

थामस ने विभिन्न राज्यों के सदस्यों द्वारा अपने प्रदेशों में चल रही खाद्य सुरक्षा योजना को आदर्श बताये जाने पर कहा कि उनकी योजनाएं एक प्रदेश के लिए आदर्श हो सकती है। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसे लागू करने के मामले में विभिन्न पक्षों पर ध्यान रखना होता है क्योंकि अलग अलग राज्यों की विभिन्न जरूरतें होती हैं। 

इस विधेयक के कानून बनने के बाद भारत दुनिया के उन चुनिन्दा देशों में शामिल हो जाएगा, जो अपनी अधिकतर आबादी को खाद्यान्न की गारंटी देते हैं।।,30,000 करोड़ रुपये के सरकारी समर्थन से खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम दुनिया का सबसे बडा कार्यक्रम होगा। इसके लिए करीब 6 करोड टन खाद्यान्न की आवश्यकता होगी।

यह विधेयक प्रति व्यक्ति प्रति माह पांच किलोग्राम चावल, गेहूं और मोटा अनाज क्रमश: 3, 2 और। रुपये प्रति किलोग्राम के तयशुदा मूल्य पर गारंटी करेगा। अंत्योदय अन्न योजना के तहत कवर लगभग 2 . 43 करोड़ अत्यंत गरीब परिवारों को 35 किलो खाद्यान्न प्रति परिवार प्रति माह मिलेगा।

कुछ राज्यों में इस तरह के उपाय बेहतर होने के बारे में सदस्यों द्वारा व्यक्त राय पर थामस ने कहा कि तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़ों की अपनी आदर्श योजनाएं हैं। हर राज्य आदर्श है। लेकिन हम उसे स्वीकार नहीं कर सकते। छत्तीसगढ में एक विशेष व्यवस्था काम कर सकती है लेकिन कोई जरूरी नहीं कि वही व्यवस्था तमिलनाडु और अन्य राज्यों में भी काम करे।

उन्होंने स्वीकार किया कि देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) कमजोर है लेकिन इसे सुधारने के लिए पिछले कुछ सालों के दौरान कदम उठाये गये हैं। (एजेंसी)