Frinds,
I got promotion and joined as Principal KV Recongpeo in HP State in India.
From-Bhajan singh gharoo
Pages
- PEOM
- Bada musikal hai jana
- Geeton ki mala
- THE RIGHT TO INFORMATION ACT, 2005
- THE CONSTITUTION OF INDIA (CONTENTS)
- Sarva Shiksha Abhiyan (SSA)
- संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण
- भारत का इतिहास
- THE CONSUMER PROTECTION RULES, 1987
- हिंदी
- Dada Sahib Falke Award
- Photoes
- Maha Kavi Daya Singh Gharoo
- मुगल साम्राज्य
- संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
- Great Lords
Sunday, July 17, 2011
Monday, June 27, 2011
kahani -2
कहानी -२
एक बार एक विधालय में ७-८ टीचेर्स थे सब लोग बच्चों को बढ़िया पढ़ते थे. पर देखा की उनका जो हैण्ड है वह रोजाना ही कोई न कोई बहाना बनाकर शहर चला जाता था पीछे से दूजे एक -दो कामचोरों को मौका मिल गया बस फिर क्या था जैसे ही उस हैण्ड को पत्ता चला की मेरी तो लोग में बेइजती कर रहे हैं. तो उसे एहसास हो गया की घर का मुखिया अगर कामचोर है तो धीरे-धीरे सब चोरी करेंगे अंत परिवार के मुखिया को अपने को सही साबित करना होता है. जो वह करता है उसका असर बाकियों पर भी जरुर पड़ेगा.
सीख़- बड़े को सोच समझ कर हर कम करना चाहिए.
द्वारा-भजन सिंह घारू
Sunday, June 26, 2011
kahani-1
कहानी-१
मैं जो कहानी कहने जा रहा हूँ वह किसी सोभाग्य से मेल खा जाती है तो इसे मात्र इतफाक ही कहा जा सकता है.
एक बैठक चल रही थी तो एक अखड़ किस्म का अफसर आया तो कहने लगा ये जितने भी नेता हैं सब को मैं अच्छी तरह से जनता हूँ. कौन कितने पानी में है यह किसी से छुपा नहीं है. मैं किसी डरता नहीं हूँ. जितने भी उपस्तिथ सज्जन जो सुन रहे थे . वे सब सोच में डूब गए की , सब चक्कर में थे की हो न हो गृहमंत्री साहब का रिश्ते दार होगा बाद में पत्ता चला की उनका पारा मीटिंग में अक्सर चढ़ जाता था . इसी परे की वजह से उन्होंने एक चिठ्ठी लिख डाली की अमुख व्यक्ति को एक जगह से दूसरी जगह पर से किक मरी जाती है (बदली की जाती है.) इसी किक पर उसने मानहानि का केस कर दिया फिर काया था कुछ दिनों बाद वह भगवान को प्यारा हो गया .
सबक- बोलते समय सयंम का उपयोग जरूरी..
द्वारा-भजन सिंह घारू
Wednesday, June 22, 2011
Wednesday, June 8, 2011
अछे नहीं लगते
हम उन्हेँ अच्छे नहीं लगते।
हम जो पहने कच्छे , अच्छे नहीं लगते।
उपरी सितारों की चमक दमक है दमदार,
अन्दर है मैल दबी हुई, अच्छे नहीं लगते॥
ऊपर की चमड़ी का रंग साफ- सुथरा ,
अन्दर है कालिख पुती हुई, अच्छे नहीं लगते॥
हम जो आह भरे, उनको सहन नहीं होता,
वो जो सरेआम चिंघाड़े ,अच्छे नहीं लगते॥
घिट जाये पूरा सामान जनता का,
हम जो सुखी डकार मारे ,अच्छे नहीं लगते॥
जरा सी पीर से कराह उठाते हैं वो ,
हम पर वारों की करे बोछार, अच्छे नहीं लगते॥
कहतें हैं उनकी बात बड़ा दम है,
हम जो बोले तो लगे बकवास ,अच्छे नहीं लगते॥
सव रचित -भजन सिंह घारू
हम जो पहने कच्छे , अच्छे नहीं लगते।
उपरी सितारों की चमक दमक है दमदार,
अन्दर है मैल दबी हुई, अच्छे नहीं लगते॥
ऊपर की चमड़ी का रंग साफ- सुथरा ,
अन्दर है कालिख पुती हुई, अच्छे नहीं लगते॥
हम जो आह भरे, उनको सहन नहीं होता,
वो जो सरेआम चिंघाड़े ,अच्छे नहीं लगते॥
घिट जाये पूरा सामान जनता का,
हम जो सुखी डकार मारे ,अच्छे नहीं लगते॥
जरा सी पीर से कराह उठाते हैं वो ,
हम पर वारों की करे बोछार, अच्छे नहीं लगते॥
कहतें हैं उनकी बात बड़ा दम है,
हम जो बोले तो लगे बकवास ,अच्छे नहीं लगते॥
सव रचित -भजन सिंह घारू
Saturday, June 4, 2011
खेल बिगाड़ा
जिस का जंहाँ लगा दांव वहां मारा, जीने का आधा खेल बिगाड़ा।
कोई लिपट गया , कोई सटक गया,
कोई अटका गया,
और कोई कर भाग गया॥
जिस का जहाँ लगा---
किसी ने बड़ा भाई बन कर घाँव किए ,
जो कभी अकेला था कहीं,
उस ने भी खंडा खोद डाला।
जिस का जंहाँ लगा धांव वहां मारा ॥
सव-रचित द्वारा- भजन सिंह घारू
कोई लिपट गया , कोई सटक गया,
कोई अटका गया,
और कोई कर भाग गया॥
जिस का जहाँ लगा---
किसी ने बड़ा भाई बन कर घाँव किए ,
जो कभी अकेला था कहीं,
उस ने भी खंडा खोद डाला।
जिस का जंहाँ लगा धांव वहां मारा ॥
सव-रचित द्वारा- भजन सिंह घारू
Subscribe to:
Posts (Atom)