Tuesday, April 12, 2011

चिन्ता

चिन्ता, चिन्ता व् फिकर एक शब्द लगता है। पर इसको समझाने की जरूरत है। सब अपने आप में व्यस्त हैं । नीतियाँ बनाने वाले अपने में मस्त हैं। कोई तो बेखर है व् कोई जनबुजकर अनजान है । कर सकता है पर उसे अपने को सवारने के अलावा समय नहीं है। कौन किसकी फिकर करेगा यह सवाल बड़ा है। बड़ी मछली छोटी मछली को खा रही है। सब देख रहें हैं कोई बोलने वाला नहीं । ऊपर वाला सब पर नजर रखे हुय है। उससे वो डरते नहीं हैं। हडियाँ जबाव दे रहीं हैं तब भी वो इकठा करने में लगा हुआ हैं। पूरा जाल उसने बिछा लिया है । फिर भी मन उस का नहीं भरा है। शायद एस से आगे का मार्ग उस के पास हो। !! चिन्ता पर चिंतन होना चाहिए !! धन्यवाद ! द्वारा-भजन सिंह घारू

Saturday, April 9, 2011

हवा

हवा , हवा के झोंकों के साथ सभी बह जाते हैं। बुडे बाप के चार बेटे थे । चारों रोज लड़ते थे तो एक दिन उस बुडे बाप ने लकड़ियों का गठा मगवाया और एक-एक लकड़ी करके एक-एक को दी व् कहा की इसे तोड़ो सब ने अपनी-अपनी लकड़ी तोड़ दी अब बुडे ने ८-१० लकड़ियों को एक-एक करके इकठा किया तथा कहा बरी-बरी से इसे तोड़ों पर कोई भी उसे नहीं तोड़ सका फिर बुडे बाप ने सब को एक साथ तोड़ने को कहा तो उसे तोड़ दिया। एकता मे बल है यह सही है। परन्तु अगर कोई अकेला ही किसी अवार्ड को प्राप्त करता है तो उसे नकारना नहीं चाहिए । सारे एक बात के पीछे ही दोड़ते हैं। द्वारा-भजन सिंह घारू

Tuesday, April 5, 2011


यह मैं हूँ ।

कोई खास बात नहीं है मुझ मे । मैं बहुत ही सीधा-साधा बन्दा हूँ। बिलकुल सही बात

करता हूँ तथा लोग मेरा कभी-कभी नाजयज फायदा उठा लेते हैं।

बस यही मेरी थोड़ी सी कमजोरी है।

बस आगे क्या कहूँ ।

द्वारा- भजन सिंह घारू

फायदा ,

फायदा, फायदा या लाभ दोनों सब्द एक ही हैं। बड़ी विचित्र सोच या यूँ कह जाय की , फायदा जिसको मिलना चाहिय उसे नहीं मिलता और जिसे जरुरी नहीं उसे यह मिल जाता है। तो परिणाम यह होता है की अभावग्रस्त लोगों की सख्या बढ जाती है। तथा साथ ही देश की माली हालत और माली हो जाती है। पूंजी व् धन से आप एश-आराम कर सकते हैं अपनी सोच नहीं बदल सकते , इन्हीं लोगों को फायदा अधिक मिलता है तो यह वर्ग अधिक शक्त हो जाता है। जब इस वर्ग का कहीं अहित होता है तो यह बड़क जाता हैं। व् दूजे लोगों को इस्तेमाल करता हैं। इसलिए समता,बराबरी ,समानता व् हित आदि का अर्थ समजना होगा और समाज का भला ऐसी में है की सामान्य हित को लेकर आगे बढे ताकि समाज ऊपर उठे। द्वारा-भजन सिंह घारू

Monday, April 4, 2011

विशव कप

विश्व कप, भारत ने २०११ का विश्व कप जीता और पूरी दुनिया में अपना नाम ऊँचा किया । पूरा देश एस टीम पर फकर करता है। मैं अपने इस ब्लॉग के माद्यम से देश के तमाम नागरिकों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। इतना जोश और अँधा विश्वास व् जूनून कभी नहीं देखा । न ही पूरी के किसी कोने में ऐसा कहीं हुआ है। सचिन, धोनी , गंबीर, विराट आदि ने मिलकर जो कमाल किया । वह तारिफेकाबिल है। ऐसी ही मिसालें देश के हर कोने से मिलनी चाहिय । तभी देश विश्व शक्ति बन सकेगा। एक बार फिर सारी टीम को बहुत -बहुत बधाई। द्वारा-भजन सिंह घारू

Friday, March 25, 2011

हमारा फर्ज

हमारा फर्ज
मित्रों आएई आज हम हमरे फर्ज के बारे में चर्चा करते हैं। जो आज के समय के लिए जरुरी है। हमारा फर्ज होना चाहिए की किस प्रकार से जनता का अधिक से अधिक भला हो और सामान्य हित को हमें नजर में रखना होगा , अगर आम आदमी की भलाई को ध्यान में रखतें हैं तो हम समाज व् जनता के कल्याणी सिंध होगें । और जनता अपना फर्ज स्वंम ही करती चलेगी तथा कहीं से विन्द्रोह की चिंगारी नहीं उठेगी। जब-जब लोगों की भावनाओं पर कुठाराघात हुआ तब-तब दुनिया में विन्द्रोह हुआ । इसीलिए कहा गया है की" हिटलर की रही ताकत हम किस खेत मुली"
धरती पर पुत्र बहुत हैं परन्तु धरती-पुत्र नहीं है । हम सब ढोंग झूठी शान को ज्यादा अच्छा मानते हैं जो खुद के लिए तथा समाज के लिए अच्छी नहीं है।
अन्तं हमारा लश्य यह होना की हम कितना दिलचस्पी से काम करते हैं। एवं आम आदमी का कितना भाल हुआ है।
आज के लिए इतना ही ! धन्यवाद
द्वारा-भजन सिंह घारू

Wednesday, March 23, 2011

सचिन को सलाम

सचिन को सलाम।
सचिन जैसे महान बल्लेबाज की तारीफ करना दिए को बाती दिखाने के संमान है। इतनी महान भारत देश का सपूत होना हमारे लिए गर्व की बात है। दूजे लोगों को भी सीख लेनी चाहिए। हर आदमी को इससे सीख लेनी की जरुरत है। अगर समय रहते भी लोग समझ जाय तो बहुत अच्छा होगा। मुझे लगता है की आजकल देश में
ऐसे लोगो की सख्त जरुरत है। मैं दूजों की बात नहीं करता मैं तो अपनी बात करता हूँ , दूजे को सीख देने से पहले अपने गरेबान में झाकना होगा , वैसे भी इमानदार लोगो दूर होते जा रहें है।
एक बार फिर ऐसे महान खिलाडी को मेरा सलाम !
द्वारा-भजन सिंह घारू